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कच्ची गाँठें

  • जीवन के ताने बाने में रिश्तों के माने खोजती ग़ज़लें। 

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    REVIEWS

    लेखा जोखा

    बाकलाम उद्दीप्त की शायरी में फ़न है, फ़िक्र का सैलाब है और उम्मीद है। खुशामदीद बेटे, दुआ है कि तुम्हारी कलम का कारवां यूँ ही चलता रहे।

    शायर रमीज़

    उद्दीप्त के तखय्युल की उड़ान बहुत ऊँची है, दुआ करूंगा कि और नए आसमान छूए। कच्ची गांठें बेहतरीन बन पड़ी है शायरी के शौक़ीन हर शख़्स को ज़रूर पढ़नी चाहिए।

    नवाज़ देओबन्दी

    अच्छे विन्यास, ख़यालों की बनावट और शब्दों की बुनावट से लबरेज शायर है उद्दीप्त। कच्ची गांठें के लिए मेरी शुभकामनाएँ और शुभआशीष।

    दीक्षित दनकौरी

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