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बाकलाम उद्दीप्त की शायरी में फ़न है, फ़िक्र का सैलाब है और उम्मीद है। खुशामदीद बेटे, दुआ है कि तुम्हारी कलम का कारवां यूँ ही चलता रहे।
उद्दीप्त के तखय्युल की उड़ान बहुत ऊँची है, दुआ करूंगा कि और नए आसमान छूए। कच्ची गांठें बेहतरीन बन पड़ी है शायरी के शौक़ीन हर शख़्स को ज़रूर पढ़नी चाहिए।
अच्छे विन्यास, ख़यालों की बनावट और शब्दों की बुनावट से लबरेज शायर है उद्दीप्त। कच्ची गांठें के लिए मेरी शुभकामनाएँ और शुभआशीष।