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अधूरे लम्स

  • जिंदगी के झंझावात के बीच ख़ुद की खोज में निकले पथिक के यात्रा चिन्ह,
    पीछे छूट गए रिश्ते और एहसास जब 
    कविताओं, गीतों और नज़मों की शक्ल अख़्तियार करते हैं,
    तो वो अधूरे लम्स एक किताब की सूरत सामने आ ही जाते हैं। 


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REVIEWS

लेखा जोखा

अधूरे लम्स हमारे अधूरे रिश्तों की व्याख्या है, उद्दीप्त की ये किताब आपको सोच की एक नयी यात्रा पर लेकर जाती है। साधुवाद।

डॉ. ललित वार्ष्णेय

Brilliant and bold. creates pictures through the words, good going uddeept.

निशीत दीक्षित

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